वेसेमिर ने बिना झिझक कहा – "मेरे पास खोने को कुछ नहीं।"
अंत में, वह अकेला खड़ा था – खून से सना, थका हुआ, लेकिन टूटा नहीं। उसने अपने कंधे पर भेड़िये की खाल डाली और काएड मोरहेन की ओर चल दिया।
काएड मोरहेन के ठंडे पहाड़ों से परे, एक छोटे से गाँव में एक लड़का रोज़ सपने देखता था। उसका नाम था । वह सपने में ना सोने के महल देखता था, ना हीरों के हार। वह सपने में देखता था – राक्षस । नुकीले दांत, जलती आँखें, और खून से लथपथ ज़मीन।
उसने अपनी माँ को देखा – जिसे उसने बचपन में राक्षसों से बचाने की कोशिश में खो दिया था। उसने उन बच्चों को देखा जो परीक्षा में मर गए थे। हर मुर्दा विकर उस पर चिल्लाया – "तू हमारा खून लेकर जी रहा है!" The Witcher Nightmare of the Wolf -2021- Hindi ...
लेकिन असली कहर तब शुरू हुआ जब उस गाँव में एक लेशी ने आतंक मचा दिया। एक ही रात में, आधा गाँव सोते-सोते मर गया। बाकी बचे लोगों ने चिल्लाकर कहा, "कहीं कोई विकर आए!"
और इस तरह, एक नए भेड़िये की कहानी शुरू हुई।
कई साल बीत गए। वेसेमिर अब एक जवान विकर था – तेज़, बेरहम, और हर तरह के राक्षस का कातिल। लेकिन उसे बार-बार एक ही बुरा सपना आता: एक सफेद भेड़िया, जिसकी आँखें उसकी माँ की तरह रो रही हों। बल्कि एक ठंडा
"सच्चा विकर वह नहीं जो राक्षसों को मारे, बल्कि वह जो अपने अंदर के राक्षस से लड़ना सीख ले।" — वेसेमिर, भेड़ियों के गुरु।
वेसेमिर ने आँखें बंद कीं। उसने अपने अंदर के गुस्से, डर और तकलीफ को आवाज़ दी – और फिर उसे अपनी तलवार में बदल दिया। वह उठा, उसकी आँखों से सिर्फ आग नहीं, बल्कि एक ठंडा, कातिलाना सुकून बह रहा था।
वेसेमिर उसी गाँव में एक नौकर था। पतला, फटेहाल, लेकिन आँखों में वो चिंगारी जो आम इंसानों में नहीं होती। बर्फीली रातों में
बच्चे ने कहा – "जो राक्षसों से लड़े।"
वेसेमिर की तलवार गिर गई। वह घुटनों पर बैठ गया।
टेट्रा ने एक नकली राक्षस बनाया – एक जो दिखने में डरावना था, लेकिन असल में वह एक जाल था। उसने इसे एक महल के पास छोड़ दिया, जहाँ राजा और रईस इकट्ठा थे।
और फिर शुरू हुआ उसका कठोर प्रशिक्षण। काएड मोरहेन के ठंडे गलियारों में, बर्फीली रातों में, जहाँ छोटे बच्चों को (Trial of the Grasses) से गुजरना पड़ता था। उस रात वेसेमिर की चीखें पूरे पहाड़ पर सुनाई दीं। उसकी आँखों से खून बहा, उसके दाँत बदले, उसके शरीर में ज़हर उतरा – लेकिन वह बच गया।
वेसेमिर ने धीरे से कहा – "हाँ। और शायद यही सबसे बड़ा दुःस्वप्न है... या सबसे बड़ी ताकत। तू क्या बनना चाहेगा?"